गुंजाइश है क्या ? लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप अक्टूबर 18, 2011 रिश्तों के दफ़्तरों में सुबह से शाम तक की हाजिरी की थकान से पस्त इंसान को घर (ख़ुद )में भी आकर भी सुकून कहाँ, सुकून के लिए किसी को समर्पण और किसी का समर्पण ज़रूरी है और हाजिरी में समर्पण की गुंजाइश है क्या ? लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ Manish Kumar19 अक्टूबर 2011 को 6:21 am बजेबहुत खूब...जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंअनुपमा पाठक19 अक्टूबर 2011 को 8:21 am बजेमात्र हाज़िरी लगाने की बात हो , फिर समर्पण कहाँ...!जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंVandana Ramasingh20 अक्टूबर 2011 को 9:02 am बजेbahut khoob ...sochne par mazboor karti rachnaजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंamrendra "amar"20 अक्टूबर 2011 को 11:16 pm बजेकोमल एहसास के साथ बहुत ख़ूबसूरत रचना! शानदार प्रस्तुती!जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंUnknown12 नवंबर 2011 को 12:49 am बजेsukoon ke liye kisi ko samarpanaur kisi ka samarpan jaroori hai mahaj ek doosre ke liye hi nahi balki sabhi ke liye samarpan ya samghouta aavysyak hai jindgi ko aage barhane ke liyeजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंDr.NISHA MAHARANA16 नवंबर 2011 को 4:15 am बजेbhut khub.जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंसंगीता स्वरुप ( गीत )20 दिसंबर 2011 को 11:22 pm बजेबहुत बढ़िया ..जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
बहुत खूब...
जवाब देंहटाएंमात्र हाज़िरी लगाने की बात हो , फिर समर्पण कहाँ...!
जवाब देंहटाएंbahut khoob ...sochne par mazboor karti rachna
जवाब देंहटाएंकोमल एहसास के साथ बहुत ख़ूबसूरत रचना! शानदार प्रस्तुती!
जवाब देंहटाएंsukoon ke liye kisi ko samarpan
जवाब देंहटाएंaur kisi ka samarpan jaroori hai
mahaj ek doosre ke liye hi nahi balki sabhi ke liye samarpan ya samghouta aavysyak hai jindgi ko aage barhane ke liye
bhut khub.
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया ..
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